بسم الله الذي لا يضر مع اسمه شيء في الأرض ولا في السماء وهو السميع العليم अल्लाह के नाम पर, जिसका नाम पृथ्वी या आसमान में कुछ भी नुकसान नहीं पहुँचाता है, और वह सुनने वाला, जानने वाला है

September 24,2022

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क़ुरआन प्रबोधन - 3: पवित्र क़ुरआन के अवतरण का इतिहास

क़ुरआन प्रबोधन - 3: पवित्र क़ुरआन के अवतरण का इतिहास

डॉ० महमूद अहमद ग़ाज़ी आज की वार्ता का शीर्षक है ‘पवित्र क़ुरआन के अवतरण का इतिहास’। इस वार्ता में मूल रूप से जो चीज़ देखनी है वह पवित्र क़ुरआन के अवतरण का विवरण और अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के ज़माने में पवित्र क़ुरआन का संकलन एवं क्रमबद्ध करना और पवित्र क़ुरआन के विषयों का आन्तरिक सुगठन और एकत्व है। जैसा कि हममें से हर एक जानता है कि पवित्र क़ुरआन का अवतरण थोड़ा-थोड़ा करके 23 साल से कुछ कम अवधि में पूरा हुआ। दूसरी आसमानी किताबों के विपरीत क़ुरआन का अवतरण एक ही बार में नहीं हुआ। परिस्थितियों की माँगों और आवश्यकतानुसार थोड़ा-थोड़ा करके अवतरित होता रहा।

क़ुरआन प्रबोधन - 2: पवित्र क़ुरआन : एक सामान्य परिचय

क़ुरआन प्रबोधन - 2: पवित्र क़ुरआन : एक सामान्य परिचय

डॉ० महमूद अहमद ग़ाज़ी पवित्र क़ुरआन अल्लाह की ओर से अवतरित की जानेवाली वह्य (ईश प्रकाशना) है और यह बात हम सब जानते हैं, लेकिन वह्य के प्रकार क्या हैं, इनपर आम तौर से दर्से-क़ुरआन (क़ुरआन प्रवचन) के ग्रुपों में चर्चा नहीं होती। और इस विषय से संबंधित बहुत-से ज़रूरी और महत्त्वपूर्ण सवाल लोगों के ज़ेहनों में बाक़ी रहते हैं। इसलिए सबसे पहले में इस विषय पर कुछ महत्त्वपूर्ण और ज़रूरी बातें पेश करता हूँ। अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) पर वह्य अलग-अलग रुपों में और विभिन्न ढंग से अवतरित होती थी। वह्य का एक हिस्सा वह है जो पवित्र क़ुरआन में सुरक्षित है और एक हिस्सा वह है जो सुन्नत और हदीस की किताबों में मौजूद है, और एक हिस्सा वह है जिसका ज़िक्र सीरत (जीवनी) की किताबों में मिलता है। इसलिए सबसे पहले हमें यह देखना चाहिए कि वह्य के कितने प्रकार हैं और पवित्र क़ुरआन का संबंध वह्य के किस प्रकार से है। पवित्र क़ुरआन की परिभाषा उलमाए-उसूल ने जो की है, सबसे पहले मैं उसका अर्थ आपके सामने पेश करता हूँ।

क़ुरआन प्रबोधन - 1: पवित्र क़ुरआन की शिक्षण-विधि - एक समीक्षा

क़ुरआन प्रबोधन - 1: पवित्र क़ुरआन की शिक्षण-विधि - एक समीक्षा

डॉ० महमूद अहमद ग़ाज़ी [क़ुरआन से संबंधित ये ख़ुतबात (अभिभाषण) जिनकी संख्या 12 है, इनमें पवित्र क़ुरआन, उसके संकलन के इतिहास और उलूमे-क़ुरआन (क़ुरआन संबंधी विद्याओं) के कुछ पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई है। इनमें यह बताया गया है कि क़ुरआन को समझने और उसकी व्याख्या करने की अपेक्षाएँ क्या हैं, उनके लिए हदीसों और अरबी भाषा के ज्ञान के साथ-साथ अरबों के इतिहास और प्राचीन अरब साहित्य की जानकारी भी क्यों ज़रूरी है और इस जानकारी के अभाव में क़ुरआन के अर्थों को समझने में क्या-क्या समस्याएँ पैदा हो सकती हैं। ये अभिभाषण क़ुरआन के शोधकर्ताओं और उसे समझने के इच्छुक पाठकों के लिए बहुत उपयोगी सिद्ध हो सकते हैं।]

अच्छे लोग इस्लाम की नज़र में

अच्छे लोग इस्लाम की नज़र में

हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने ख़ुदा के हुक्म से और ख़ुदा की ओर से इनसानों को उनकी पूरी ज़िन्दगी के लिए ऐसे सुनहरी उसूल और शिक्षाएँ दी हैं कि उनपर अमल करके इंसान की ज़िन्दगी सुख—शान्ति की ज़िन्दगी बन सकती है और फिर एक बेहतरीन समाज वुजूद में आ सकता है। प्यारे नबी हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने उन शिक्षाओं पर ख़ुद अमल करके और अपने साथियों (सहाबा रज़ियल्लाहु अन्हुम) को उसपर अमल करा के एक ऐसा मिसाली समाज बनाकर दिखा दिया जो रहती दुनिया तक एक नमूना और एक आईना है। इस नमूने और इस आईने को सामने रखकर हम मुसलमान अपनी ज़िन्दगी का जाइज़ा लें और उसके मुताबिक़ ज़िन्दगी गुज़ारने की कोशिश करें ताकि दुनिया और आख़िरत में हम कामयाब हों। इस किताब में इनसान की पूरी ही ज़िन्दगी के बारे में इस्लाम की शिक्षाएँ बड़े ही सादा अन्दाज़ में पेश की गई हैं, ताकि उनको समझना और अमल करना आसान हो।

हदीस लेक्चर 12: उलूमे-हदीस - आधुनिक काल में

हदीस लेक्चर 12: उलूमे-हदीस - आधुनिक काल में

[ये ख़ुतबात (अभिभाषण) जिनकी संख्या 12 है, इस में इल्मे-हदीस (हदीस-ज्ञान) के विभिन्न पहुलुओं पर चर्चा की गई है । इसमें इल्मे-हदीस के फ़न्नी मबाहिस (कला पक्ष) पर भी चर्चा है । इलमे-हदीस के इतिहास पर भी चर्चा है और मुहद्दिसीन (हदीस के ज्ञाताओं) ने हदीसों को इकट्ठा करने, जुटाने और उनका अध्ययन तथा व्याख्या करने में जो सेवाकार्य किया है, उनका भी संक्षेप में आकलन किया गया है।]

हदीस लेक्चर 11: भारतीय उपमहाद्वीप में इल्मे-हदीस

हदीस लेक्चर 11: भारतीय उपमहाद्वीप में इल्मे-हदीस

[ये ख़ुतबात (अभिभाषण) जिनकी संख्या 12 है, इस में इल्मे-हदीस (हदीस-ज्ञान) के विभिन्न पहुलुओं पर चर्चा की गई है । इसमें इल्मे-हदीस के फ़न्नी मबाहिस (कला पक्ष) पर भी चर्चा है । इलमे-हदीस के इतिहास पर भी चर्चा है और मुहद्दिसीन (हदीस के ज्ञाताओं) ने हदीसों को इकट्ठा करने, जुटाने और उनका अध्ययन तथा व्याख्या करने में जो सेवाकार्य किया है, उनका भी संक्षेप में आकलन किया गया है।]

हदीस लेक्चर 10: हदीस और उसकी व्याख्या की किताबें

हदीस लेक्चर 10: हदीस और उसकी व्याख्या की किताबें

[ये ख़ुतबात (अभिभाषण) जिनकी संख्या 12 है, इस में इल्मे-हदीस (हदीस-ज्ञान) के विभिन्न पहुलुओं पर चर्चा की गई है । इसमें इल्मे-हदीस के फ़न्नी मबाहिस (कला पक्ष) पर भी चर्चा है । इलमे-हदीस के इतिहास पर भी चर्चा है और मुहद्दिसीन (हदीस के ज्ञाताओं) ने हदीसों को इकट्ठा करने, जुटाने और उनका अध्ययन तथा व्याख्या करने में जो सेवाकार्य किया है, उनका भी संक्षेप में आकलन किया गया है।]

हदीस लेक्चर 9: उलूमे-हदीस (हदीसों का ज्ञान)

हदीस लेक्चर 9: उलूमे-हदीस (हदीसों का ज्ञान)

[ये ख़ुतबात (अभिभाषण) जिनकी संख्या 12 है, इस में इल्मे-हदीस (हदीस-ज्ञान) के विभिन्न पहुलुओं पर चर्चा की गई है । इसमें इल्मे-हदीस के फ़न्नी मबाहिस (कला पक्ष) पर भी चर्चा है । इलमे-हदीस के इतिहास पर भी चर्चा है और मुहद्दिसीन (हदीस के ज्ञाताओं) ने हदीसों को इकट्ठा करने, जुटाने और उनका अध्ययन तथा व्याख्या करने में जो सेवाकार्य किया है, उनका भी संक्षेप में आकलन किया गया है।]

हदीस लेक्चर 8: रुहला (यात्रा) और मुहद्दिसीन की सेवाएँ

हदीस लेक्चर 8: रुहला (यात्रा) और मुहद्दिसीन की सेवाएँ

[ये ख़ुतबात (अभिभाषण) जिनकी संख्या 12 है, इस में इल्मे-हदीस (हदीस-ज्ञान) के विभिन्न पहुलुओं पर चर्चा की गई है । इसमें इल्मे-हदीस के फ़न्नी मबाहिस (कला पक्ष) पर भी चर्चा है । इलमे-हदीस के इतिहास पर भी चर्चा है और मुहद्दिसीन (हदीस के ज्ञाताओं) ने हदीसों को इकट्ठा करने, जुटाने और उनका अध्ययन तथा व्याख्या करने में जो सेवाकार्य किया है, उनका भी संक्षेप में आकलन किया गया है।]

हदीस लेक्चर 7: तदवीने-हदीस (हदीसों का संकलन)

हदीस लेक्चर 7: तदवीने-हदीस (हदीसों का संकलन)

[ये ख़ुतबात (अभिभाषण) जिनकी संख्या 12 है, इस में इल्मे-हदीस (हदीस-ज्ञान) के विभिन्न पहुलुओं पर चर्चा की गई है । इसमें इल्मे-हदीस के फ़न्नी मबाहिस (कला पक्ष) पर भी चर्चा है । इलमे-हदीस के इतिहास पर भी चर्चा है और मुहद्दिसीन (हदीस के ज्ञाताओं) ने हदीसों को इकट्ठा करने, जुटाने और उनका अध्ययन तथा व्याख्या करने में जो सेवाकार्य किया है, उनका भी संक्षेप में आकलन किया गया है।]