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Hindi Islam हिंदी इस्लाम मुख पृष्ठ

بسم الله الذي لا يضر مع اسمه شيء في الأرض ولا في السماء وهو السميع العليم अल्लाह के नाम पर, जिसका नाम पृथ्वी या आसमान में कुछ भी नुकसान नहीं पहुँचाता है, और वह सुनने वाला, जानने वाला है

August 15,2022

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मानवता उपकारक हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम)

मानवता उपकारक हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम)

अरब के लोग बेटियों की हत्या कर देते थे। भारत में भी यही प्रथा थी। क़ुरआन ने लोगों को इस दुष्कर्म से मना किया। महा ईशदूत ने बेटियों से स्नेह की शिक्षा ही नहीं दी, बल्कि स्नेह के साथ सम्मान का आदर्श भी उपस्थित किया। बेटियों को पाल-पोसकर विवाह कर फल जन्नत में अपने निकट स्थान, बताया। स्त्रियों को बहुत सम्मानित किया। माता की सेवा का फल भी जन्नत और बेटी से स्नेह और लालन-पालन का फल भी जन्नत बताया गया। बहन को भी बेटी के बराबर ठहराया गया। पत्नी को दाम्पत्य जीवन, घराने व समाज में आदरणीय, पवित्र, सुखमय व सुरक्षित स्थान प्रदान किया गया।

इस्लाम एक परिचय

इस्लाम एक परिचय

अबू मुहम्मद इमामुद्दीन रामनगरी जिस प्रकार संसार मे बहुत-सी जातियॉ और बहुत से धर्म हैं उसी प्रकार मुसलमानों को भी एक जाति समझ लिया गया है और इस्लाम को केवल उन्ही का धर्म। लेकिन यह एक भ्रम है। सच यह है कि मुसलमान इस अर्थ मे एक जाति नही है, जिस अर्थ में वंश, वर्ण और देश के सम्बन्ध से जातियॉं बना करती हैं और इस अर्थ में इस्लाम भी किसी विशेष जाति का धर्म नही है। यह समस्त मानव जाति और पूरे संसार का एक प्राकृतिक धर्म और स्वाभाविक जीवन सिद्धांत है।

बच्चे और इस्लाम

बच्चे और इस्लाम

मौलाना सैयद जलालुद्दीन उमरी इंसान का छोटा-सा बच्चा क़ुदरत का अजीब करिश्मा है। उसके भोले-भाले व्यक्तित्व में कितना सम्मोहन और आकर्षण होता है। उसकी मासूम अदाएँ, उसकी मुस्कराहट, उसकी दिलचस्प और टूटी-फूटी बातें, उसकी चंचलता और शरारतें, उसका खेल-कूद, मतलब यह कि उसकी कौन-सी अदा है जो दिल को लुभाती और सुरूर और खुशियों से न भर देती हो। फिर एक-दूसरे पहलू से देखिए। हमें नही मालूम कि क़ुदरत ने किस बच्चे में कितनी और किस प्रकार की सलाहियतें रखी हैं और वही आगे चलकर कौन-सी सेवा या कार्य करने वाला है।

इस्लाम में बलात् धर्म परिवर्तन नहीं

इस्लाम में बलात् धर्म परिवर्तन नहीं

अबू मुहम्मद इमामुद्दीन रामनगरी यह पुस्तक बताएगी कि जिहाद और जिज़्या की वास्तविकता क्या है और विरोधी जो प्रचार करते हैं वह कितना भ्रष्ट और द्वेषपूर्ण तथा निराधार है। यह पुस्तक पहली बार 1945 ई0 में प्रकाशित हुई थी। स्वतंन्त्र भारत की मांग यह है कि इस्लाम के विरुद्ध जो द्वेषपूर्ण प्रचार हुआ है, उसका निवारण किया जाए। हिन्दू-मुस्लिम एकता स्थापित हो और दोनों धर्मावलम्बी एक मत होकर नास्तिकता से धर्म की रक्षा करें जो इस देश की सबसे बड़ी विशेषता है और देश को समुन्नत बनाएँ।

इस्लाम का परिचय

इस्लाम का परिचय

मौलाना वहीदुद्दीन खां आर्य समाज स्युहारा, ज़िला बिजनौर ने अपने चौंसठ वर्षीय समारोह के अवसर पर नवम्बर सन् 1951 के अन्त में एक सप्ताह मनाया। इस मौक़े पर 21 नवम्बर को एक आम धार्मिक सभा भी हुई जिसमें विभिन्न धर्मों के विद्वानों ने शामिल होकर अपने विचार व्यक्त किये। यह लेख इसी अंतिम सभा में पढ़ा गया।

हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहुअलैहिवसल्लम) का संदेश

हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहुअलैहिवसल्लम) का संदेश

मौलाना सैयद अबुल आला मौदूदी अल्लाह के रसूल मुहम्मद (सल्लल्लाहुअलैहिवसल्लम) एक फ़ौजी जनरल भी थे, और आपके नेतृत्व में जितनी लड़ाइयां हुईं, उन सबका विस्तृत विवेचन हमें मिलता है। आप एक शासक भी थे और आप के शासन के तमाम हालात हमें मिलते हैं। आप एक जज भी थे और आप के सामने पेश होने वाले मुक़दमों की पूरी-पूरी रिपोर्ट हमें मिलती है और यह भी मालूम होता है कि किस मुक़दमे में आप ने क्या फ़ैसला फ़रमाया। आप बाज़ारों में भी निकलते थे और देखते थे कि लोग क्रय-विक्रय के मामले किस तरह करते हैं। जिस काम को ग़लत होते हुए देखते उस से मना फ़रमाते थे और जो काम सही होते देखते, उसकी पुष्टि करते थे। तात्पर्य यह कि जीवन का कोई विभाग ऐसा नहीं है, जिसके बारे में आप ने सविस्तार आदेश न दिया हो।

इस्लाम की सार्वभौमिक शिक्षाएं

इस्लाम की सार्वभौमिक शिक्षाएं

डॉ फरहत हुसैन धरती पर मनुष्य ही वह प्राणी है जिसे विचार तथा कर्म की स्वतंत्रता प्राप्त है, इसलिए उसे संसार में जीवन-यापन हेतु एक जीवन प्रणाली की आवश्यकता है। मनुष्य नदी नहीं है जिसका मार्ग पृथ्वी की ऊंचाई-नीचाई से स्वयं निश्चित हो जाता है। मनुष्य निरा पशु-पक्षी भी नहीं है कि पथ-प्रदर्शन के लिए प्राकृति ही प्रयाप्त हो। अपने जीवन के एक बड़े भाग में प्राकृतिक नियमों का दास होते हुए भी मनुष्य जीवन के ऐसे अनेक पहलू रखता है जहां कोई लगा-बंधा मार्ग नहीं मिलता, बल्कि उसे अपनी इच्छा से मार्ग का चयन करना पड़ता है।

बाबा साहब डा. अम्बेडकर और इस्लाम

बाबा साहब डा. अम्बेडकर और इस्लाम

आर एस आदिल (पूर्व दलित) मूल रूप से पशु और मनुष्य में यही विशेष अंतर है कि पशु अपने विकास की बात नहीं सोच सकता, मनुष्य सोच सकता है और अपना विकास कर सकता है। हिन्दु धर्म ने दलित वर्ग को पशुओं से भी बदतर स्थिति में पहुंचा दिया है, यही कारण है कि वह अपनी स्थिति परिवर्तन के लिए पूरी तरह कोशिश नहीं कर पा रहा है। हाँ, पशुओं की तरह ही वह अच्छे चारे की खोज में तो लगा है लेकिन अपनी मानसिक ग़ुलामी दूर करने के अपने महान उद्देश्य को गंभीरता से नहीं ले रहा है।

30 Mar 2020
इस्लाम का ही अनुपालन क्यों ?

इस्लाम का ही अनुपालन क्यों ?

मुर्शफ अली इस्लाम की ओर आकर्षित करने वाला पहला कारण यह है कि इस्लामी आस्था एवं अवधारणा बिल्कुल स्पष्ट और आसानी से समझ में आने वाली है। इनमें किसी तरह की कोई पेचीदगी या उलझाव नहीं है। इन्हें समझने के लिए वह ज्ञान काफ़ी है जो प्रत्येक मनुष्य को स्वाभाविक रूप से प्राप्त है। इस्लामी सिद्धांत और नियम मानव स्वभाव के अनुकूल भी है और यह बौद्धिक स्तर पर भी खरे उतरे हैं। आइए हम निष्पक्ष होकर देखें कि इस्लाम में क्या-क्या आकर्षण है!

एकेश्वरवाद (तौहीद) मानव-प्रकृति के पूर्णतः अनुकूल है

एकेश्वरवाद (तौहीद) मानव-प्रकृति के पूर्णतः अनुकूल है

एकेश्वरवाद (तौहीद) दिल की दुनिया बदल देने वाली एक क्रांतिकारी, कल्याणकारी, सार्वभौमिक, सर्वाधिक महत्वपूर्ण और मानव-प्रकृति के बिल्कुल अनुकूल अवधारणा है जो आदमी को सिर्फ़ और सिर्फ़ एक अल्लाह या ईश्वर की बन्दगी और दासता की शिक्षा देती है। एक अल्लाह के आगे सजदा करने या झुकने वाला आदमी बाक़ी सारे बनावटी और नक़ली खुदाओं के सजदे और दासता से छुटकारा पा जाता है। और अल्लाह की नज़र में सारे इंसान एक समान हो जाते हैं। अल्लाह की नज़र में किसी के बड़ा या छोटा होने का मानदंड उसका कर्म है।