بسم الله الذي لا يضر مع اسمه شيء في الأرض ولا في السماء وهو السميع العليم अल्लाह के नाम पर, जिसका नाम पृथ्वी या आसमान में कुछ भी नुकसान नहीं पहुँचाता है, और वह सुनने वाला, जानने वाला है

November 30,2022

प्रदर्शित फ़िक़्ह

इस्लाम में पाकी और सफ़ाई

सफ़ाई-सुथराई और स्वच्छता व पवित्रता का प्रभाव इनसान के दिल और दिमाग़ पर तो पड़ता ही है, इनसान और इनसानी समाज की सेहत की बेहतरी का भी इससे बड़ा गहरा सम्बन्ध है। सफ़ाई-सुथराई को हर इनसान फ़ितरी तौर पर पसन्द करता है, यह और बात है कि इसका तरीक़ा, मेयार और पैमाना लोगों की नज़र में अलग-अलग होता है। इस किताब को पढ़ने के बाद पाठकों को न केवल यह कि सफ़ाई एवं स्वच्छता व पवित्रता के बारे में सही जानकारी हासिल होगी, बल्कि उन पर यह हक़ीक़त भी खुल जाएगी कि इस्लाम में इसका क्या महत्व है? सफ़ाई, स्वच्छता एवं पवित्रता को ईश-उपासना, नमाज़ आदि के लिए ज़रूरी ठहराया गया है और सफ़ाई-सुथराई से लापरवाह लोगों को आख़िरत के अज़ाब से सावधान किया गया है। इस बात से इसका महत्व अच्छी तरह समझा जा सकता है।

फ़िक़्ह

हज और उसका तरीक़ा (विस्तार से)

यह किताब हज करनेवालों के लिए लिखी गई है। इसमें इस बात की पूरी कोशिश की गई है कि हज के सभी मक़सद और उसकी हक़ीक़त व रूह के तमाम पहलू, जो क़ुरआन और सुन्नत से साबित हैं, पढ़नेवालों के सामने आ जाएँ, साथ ही उन अमली तदबीरों की भी निशानदेही कर दी गई है जिनको अपनाकर उन मक़सदों को हासिल किया जा सकता है और ये सबकुछ ऐसे ढंग से लिखा गया है कि हज की हक़ीक़त और रूह खुलकर सामने आने के साथ दीन के बुनियादी तक़ाज़े भी पूरी तरह उभरकर सामने आ जाते हैं।

हज कैसे करें (संछिप्त)

“बेशक मैंने इबराहीम के रास्ते पर रहते हुए यकसू होकर अपना रुख़ उस हस्ती की तरफ़ कर लिया जिसने ज़मीन और आसमानों को पैदा किया और मैं मुशरिक नहीं हूँ। बेशक मेरी नमाज़, मेरी क़ुरबानी, मेरा जीना और मेरा मरना अल्लाह ही के लिए है जो तमाम जहानों का रब है। उसका कोई शरीक नहीं है। मुझे उसी का हुक्म है और सबसे पहले हुक्म माननेवाला मैं हूँ। ऐ अल्लाह, ये तेरे लिए है और तेरा ही दिया हुआ है। "

अज़ान और नमाज़ क्या है

आज बहुत-सी समस्याओं की असल वजह एक-दूसरे के बारे में सही जानकारी का न होना है। यह बड़े दुख की बात है कि जानकारी हासिल करने के इतने अधिक संसाधन मौजूद होते हुए भी हम सभ्य एवं शिक्षित कहे जानेवाले लोग परस्पर एक-दूसरे के बारे में अंधरे में रहते हैं। जानकारी न होने और द्वेष के कारण ऐसा भी होता है कि मुनष्य ऐसी बात का दुश्मन हो जाता है जो वास्तव में उसकी भलाई और कल्याण की है। ऐसा ही कुछ इस्लाम और उसकी शिक्षाओं के साथ हुआ है और बराबर हो रहा है।

इस्लाम में पाकी और सफ़ाई

सफ़ाई-सुथराई और स्वच्छता व पवित्रता का प्रभाव इनसान के दिल और दिमाग़ पर तो पड़ता ही है, इनसान और इनसानी समाज की सेहत की बेहतरी का भी इससे बड़ा गहरा सम्बन्ध है। सफ़ाई-सुथराई को हर इनसान फ़ितरी तौर पर पसन्द करता है, यह और बात है कि इसका तरीक़ा, मेयार और पैमाना लोगों की नज़र में अलग-अलग होता है। इस किताब को पढ़ने के बाद पाठकों को न केवल यह कि सफ़ाई एवं स्वच्छता व पवित्रता के बारे में सही जानकारी हासिल होगी, बल्कि उन पर यह हक़ीक़त भी खुल जाएगी कि इस्लाम में इसका क्या महत्व है? सफ़ाई, स्वच्छता एवं पवित्रता को ईश-उपासना, नमाज़ आदि के लिए ज़रूरी ठहराया गया है और सफ़ाई-सुथराई से लापरवाह लोगों को आख़िरत के अज़ाब से सावधान किया गया है। इस बात से इसका महत्व अच्छी तरह समझा जा सकता है।

नमाज़ का आसान तरीक़ा

नमाज़ की कुछ शर्ते हैं। जिनका पूरा किये बिना नमाज़ नहीं हो सकती या सही नहीं मानी जा सकती। कुछ शर्तो का नमाज़ के लिए होना ज़रूरी है, तो कुछ शर्तो का नमाज़ के लिए पूरा किया जाना ज़रूरी है।

मोज़े पर मसह

मोज़ा चमड़े या कपड़े से बनाए गए वस्त्र को कहते हैं जो पांव के साथ टखने को छुपाए। पुरूष तथा महिला के लिए मोज़े पर मसह करना जाइज़ है। चाहे गर्मी का समय हो या जाड़ा का समय हो,

स्नान करने का तरीक़ा

कुछ चीजों से स्नान करना आवश्यक हो जाता है

 तयम्मुम करने का सही तरीका

जब किसी व्यक्ति के लिए पानी का प्रयोग कष्ठकारण हो या पानी उपलब्ध न हो तो उस समय अल्लाह तआला ने मुसलमानों पर सरलता करते हुए तयम्मुम करने की अनुमति दी है

वुज़ू कैसे करें ?

वुज़ू का तरीक़ा

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