بسم الله الذي لا يضر مع اسمه شيء في الأرض ولا في السماء وهو السميع العليم अल्लाह के नाम पर, जिसका नाम पृथ्वी या आसमान में कुछ भी नुकसान नहीं पहुँचाता है, और वह सुनने वाला, जानने वाला है

November 30,2022

अर्थशास्त्र

इन्सान की आर्थिक समस्या और उसका इस्लामी हल

इंसान का आर्थिक मसला हमको यह नज़र आता है कि सभ्यता के विकास की रफ़्तार को क़ायम रखते हुए किस तरह सभी लोगों तक जीवन की ज़रूरत की चीज़ें पहुँचाने का प्रबन्ध हो और किस तरह समाज में हर व्यक्ति को अपनी सामर्थ्य और योग्यता के अनुसार प्रगति करने, अपने व्यक्तित्व को विकसित करने और अपनी पूर्णता को प्राप्त होने तक अवसर उपलब्ध रहे? इस्लाम क्या आदेश देता है।?

आधुनिक पूंजीवादी समाज में शिक्षा, उपचार और न्याय

दुनिया की इक्कीस सभ्यताओं में किसी भी शिक्षक ने कभी पैसे लेकर शिक्षा नहीं दी और न किसी डॉक्टर, हकीम, वैद्य और चिकित्सक ही ने किसी रोगी की जाँच कभी पैसे लेकर की, न किसी रोगी को इस कारण देखने से इनकार किया कि रोगी के पास पैसे नहीं हैं, इसके बावजूद उन 21 सभ्यताओं के सभी शिक्षक खाते-पीते लोग थे और अपने घर का ख़र्च भी उठाते थे। उन 21 सभ्यताओं के डॉक्टर और हकीम किसी रोगी से एक पैसा माँगे बिना भी ख़ुशहाल और सम्पन्न जीवन जीते थे, भूखे नहीं मरते थे।

इस्लामी अर्थशास्त्र:  एक परिचय

“धरती पर चलनेवाला कोई जीव ऐसा नहीं है जिसकी आजीविका अल्लाह के ज़िम्मे न हो।” (क़ुरआन, सूरा-11 हूद, आयत-06) “यह तो हमारी कृपा है कि हमने आदम की सन्तान को श्रेष्ठता दी तथा थल व जल में सवारियाँ प्रदान कीं तथा उनको पवित्र वस्तुओं से आजीविका और अपनी रचनाओं पर स्पष्ट श्रेष्ठता प्रदान की।” (क़ुरआन, सूरा-17 बनी-इसराईल, आयत-70)

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