بسم الله الذي لا يضر مع اسمه شيء في الأرض ولا في السماء وهو السميع العليم अल्लाह के नाम पर, जिसका नाम पृथ्वी या आसमान में कुछ भी नुकसान नहीं पहुँचाता है, और वह सुनने वाला, जानने वाला है

June 29,2022

सीरत

जीवनी हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम

जीवनी हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम

इस किताब के अध्ययन से अल्लाह के पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के जीवन की प्रमुख झलकियाँ आपके सामने आएंगी और इस किताब को पढ़नेवाला ऐसा महसूस करेगा, जैसे वह ख़ुद उस दौर से गुज़र रहा है, जिस दौर से पैग़म्बरे इस्लाम गुज़रे हैं। सलामती और रहमत हो उस पाक नबी पर जिसने मानवता को दुनिया में रहने का सही ढंग और ख़ुदा तक पहुँचने का सच्चा मार्ग दिखाया। मुबारकबाद हो उन लोगों को जो स्वयं अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के मार्ग पर चलें और दुनिया को इस मार्ग पर चलने की दावत दें।

जगत्-गुरु (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम)

जगत्-गुरु (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम)

जगत-गुरु (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) दरअस्ल 'हादी-ए-आज़म (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम)' (उर्दू) का नया हिन्दी तर्जमा है। 'हादी-ए-आज़म' किताब जनाब अबू-ख़ालिद साहब (एम॰ ए॰) ने ख़ास तौर पर बच्चों के लिए लिखी थी, जो बहुत ज़्यादा पसंद की गई और बहुत-से स्कूलों और मदरसों में यह किताब पढ़ाई जा रही है।

हम ऐसी बनें!

हम ऐसी बनें!

अच्छी बात क़बूल करने का एक ज़रिया यह भी है कि चाहे ज़बान से कुछ न कहा जाए, क़लम से कुछ न लिखा जाए, लेकिन अच्छी बातों और अच्छे अख़लाक़ का नमूना सामने आ जाए, साथ ही इनसानियत की चलती-फिरती तस्वीरों में वह समा जाए तो यह नमूना बहुत असरदार होता है। कुछ महान महिलाओं (सहाबियात) के जीवन से उच्च नैतिकता के चंद उदाहरण पढिए इस किताब में

जायसी के दोहे और इस्लाम के अन्तिम पैगंबर मुहम्मद (सल्ल०)

जायसी के दोहे और इस्लाम के अन्तिम पैगंबर मुहम्मद (सल्ल०)

सोरठा : साईं केरा नाँव, हिया पूर, काया भरी । मुहम्मद रहा न ठाँव, दूसर कोइ न समाइ अब ॥ अर्थ :- साईं (मुहम्मद (सल्ल०)) के नाम से तन एवं हृदय पूर्ण रूप से भर चुका है, मुहम्मद (सल्ल०) के बिना चैन नहीं है, अब हृदय में दूसरा कोई समा भी नहीं सकता ।

हज़रत मुहम्मद (सल्ल.): एक महान समाज-सुधारक

हज़रत मुहम्मद (सल्ल.): एक महान समाज-सुधारक

“और जब उनसे कहा जाता है कि अल्लाह ने जो उतारा है उसका अनुसरण करो, तो कहते हैं कि हमने अपने बाप-दादा को जिस तरीक़े पर पाया है, वही हमारे लिए काफ़ी है। क्या उनके बाप-दादा न कुछ जानते हों और न सीधे रास्ते पर हों तब भी वे उन्हीं का अनुसरण करेंगे?” (क़ुरआन - 2:170)

हज़रत मुहम्मद (स०): जीवन और सन्देश

हज़रत मुहम्मद (स०): जीवन और सन्देश

"नाप-तौल में कमी न करो, नाप कर दो तो पूरा-पूरा दो, वज़्न करो तो तराज़ू ठीक रखो (मामलों में) यह तरीक़ा उत्तम और परिणाम की दृष्टि से बहुत अच्छा है। जिस बात का तुम्हें ज्ञान नहीं है उसके पीछे न पड़ो, याद रखो कान, नाक, आंख, दिल हर एक के बारे में अल्लाह के यहाँ पूछा जाएगा। धरती में इतरा कर न चलो, तुम न धरती को फाड़ सकते हो, और न पहाड़ की ऊँचाई को पहुँच सकते हो। ये बातें अल्लाह की दृष्टि में अप्रिय हैं।” (क़ुरआन, 17:35-38)

उमर बिन अब्दुल अज़ीज़ (रह॰)

उमर बिन अब्दुल अज़ीज़ (रह॰)

माइल खैराबादी (रह॰)

अल्लाह के रसूल  मुहम्मद (सल०) की साथी महिलाएं (सहाबियात)

अल्लाह के रसूल मुहम्मद (सल०) की साथी महिलाएं (सहाबियात)

तालिब हाशिमी साहब की किताब से सहाबियात (रज़ि०) की शख्सियत का हर पहलू रौशन हो जाता है। उनकी बहादुरी, उनके बुलन्द हौसले, उनके ईमान की मज़बूती, उनकी नबी (सल्ल०) से निहायत अक़ीदत व मुहब्बत, जाँनिसारी का जज़्बा जैसी तमाम ख़ासियतें सामने आ जाती हैं। 'तज़कारे सहाबियात' जैसी किताब का फ़ायदा हिन्दी जाननेवालों को मिल सके इसके लिए इसका हिन्दी तर्जमा करने का फ़ैसला लिया गया।

पैग़म्बर मुहम्मद (सल्ल.) का रवैया अपने दुश्मनों के साथ

पैग़म्बर मुहम्मद (सल्ल.) का रवैया अपने दुश्मनों के साथ

आज जब हम पैग़म्बरों की जीवनी तथा उनकी शिक्षाओं का अध्ययन करते हैं, तो हमें बड़ा आश्चर्य होता है कि इन मेहरबान पैग़म्बरों का विरोध लोगों ने क्यों किया? सच्ची बातों पर आधारित उनकी शिक्षाओं को देशवासियों ने क्यों न स्वीकार कर लिया? हर एक पैग़म्बर का उनके अपने काल में विरोध किया गया, उनका उपहास किया गया, हर प्रकार के अत्याचार उनपर किए गए ।

हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) : एक संक्षिप्त परिचय

हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) : एक संक्षिप्त परिचय

डॉक्टर मुहम्मद अहमद हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) बहादुर होने के साथ बहुत ही नरम दिल थे। आप कमज़ोर लोगों के साथ ही बेज़ुबान जानवरों तक के बारे में नरमी का हुक्म फ़रमाते थे। आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की जीवन व शिक्षा का सार और उद्देश्य यह है कि इन्सान अपने एकमात्र स्रष्टा और पालनहार के बताये हुए मार्ग पर चलकर ही ज़िन्दगी गुज़ारे ताकि वह इस लोक और परलोक में सफलता प्राप्त कर सके।